दिल्ली की सर्द रातें यूँ ही कठोर नहीं कही जातीं। खासकर उनके लिए, जो इलाज की आस में एम्स दिल्ली के बाहर सड़कों पर समय गुज़ारने को मजबूर हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश से आए अनेक मरीज और उनके परिजन बीमारी की पीड़ा के साथ-साथ ठंड की तीव्र मार भी सहन कर रहे हैं।
ऐसे हालात में समाजसेवी संतदेव चौहान का मानवीय कदम इन लोगों के लिए राहत की सांस बनकर सामने आया। जब उन्होंने एम्स परिसर के बाहर खुले आसमान के नीचे बैठे मरीजों और उनके परिवारों को देखा, तो बिना देर किए मदद का संकल्प लिया। ठंड से बचाव के लिए उन्होंने ज़रूरतमंदों तक गर्म कपड़े पहुँचाए, जिससे सर्दी से जूझ रहे चेहरों पर राहत दिखाई दी।
संतदेव चौहान ने कहा कि इलाज की उम्मीद लेकर दिल्ली पहुँचे ये लोग पहले ही मानसिक और शारीरिक तनाव में होते हैं। “अगर थोड़ी-सी सेवा से उनके चेहरे पर सुकून लौट आए, तो यही सबसे बड़ी उपलब्धि है,” उन्होंने कहा।
इस सेवा कार्य में राजीव महर्षि फ़ाउंडेशन की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को यह भरोसा देना है कि संकट की घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि सर्दी की चिंता से मुक्त होकर मरीज अपने इलाज पर बेहतर ढंग से ध्यान दे सकें, यही इस प्रयास का लक्ष्य है।
इस दौरान संतदेव चौहान और फ़ाउंडेशन की टीम द्वारा सैकड़ों जरूरतमंदों को गर्म कपड़े वितरित किए गए। ठंड से कांपते लोगों के चेहरों पर जब मुस्कान लौटी, तो यह साफ दिखा कि संवेदनशीलता और सेवा की ताकत किसी भी मौसम से बड़ी होती है।
सर्दियों की इस ठिठुरन भरी रात में संतदेव चौहान की पहल ने न सिर्फ ज़रूरतमंदों को राहत दी, बल्कि समाज के सामने यह उदाहरण भी रखा कि इंसानियत आज भी जीवित है—बस उसे निभाने वाले हाथों की ज़रूरत होती है।

