Koala: मीडिया बाबू आज आपको एक ऐसे जानवर से मिलाएंगे जिनके जिंदगी का एक बडा हिस्सा सोने में ही बीत जाता है। जी हाँ आपको यकीन हो ना हो लेकिन पेड़ों पर रहने वाला ये दुर्लभ प्रजाति का जानवर 24 घंटों में 16 से 18 घंटे सोने में ही बिता देता है। हम बात कर रहे हैं कोआला की जो केवल ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाए जाते हैं।

Koala: ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी हिस्से में मिलते हैं कोआला
ये दिखने में छोटा पांडा या भालू की तरह होता है और काफी मासूम-सा दिखता है। ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी हिस्से में कोआला को पेड़ों पर उछल कूद मचाते या फिर गहरी नींद में सोते हुए देखा जा सकता है। ज्यादातर ये यूकेलिप्टस के जंगलों में पाए जाते हैं। शोध वैज्ञानिकों ने कोआला का लगभग 2 करोड़ साल पहले का जीवाश्म पाया था।

Koala: कैसा दिखता है, क्या है इसकी पहचान?
चलिए अब ये भी जान लेते हैं कि कोआला को कैसे पहचाना जा सकता है। आमतौर पर कोआला का वजन 12 से 14 किलोग्राम का होता है और इनके पूरे शरीर पर घने भूरे रंग के बाल होते हैं। इनकी नाक लंबी होती है और जो अक्सर काले या गुलाबी रंग की होती है। पेड़ों पर ही रहने वाले इस जानवर के पंजे काफी मजबूत होते हैं।
यही वजह है कि कोआला एक बंदरों की तरह आसानी से पेड़ों पर चढ जाता है। कमाल की बात ये है कि इनके फिंगरप्रिंट’ भी इंसानों की तरह होते हैं। जबकि कोआला का आकार 65 से 85 सेंटीमीटर होता है।

Koala: आखिरी दुर्लभ जीव है
ये जानना भी जरूरी है कि कोआला किस प्रजाति का जानवर है। तो हम आपको बता दे कोआला-कोआला (Phascolarctidae) फैसकोलार्कटिडाए प्रजाति का आखिरी और दुर्लभ जानवर है।और ये ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाला स्थानिक (Endemic) जीव है।
इस शाकाहारी जीव का भोजन पेड़ की पत्तियाँ है और ये ज्यादातर यूकेलिप्ट्स की पत्तियाँ खाना पसंद करता है।और इन्हीं पत्तियों को खाने की वजह से कोआला काफी देर तक सोते हैं। क्योंकि यूकेलिप्टस की पत्तियाँ में पोषक तत्वों की मात्रा बेहद कम होती है। यही वजह है कि कोआला को ज्यादा नींद आती है।
और कमाल की बात ये है कि कोआला एक दिन में करीब एक किलो यूकेलिप्टस के पत्तों को खा जाता है। इतना ही नहीं कोआला पानी भी नहीं पीता क्योंकि पानी की कमी वह यूकेलिप्टस के पत्तों से ही पूरा कर लेता हैं।
इन पत्तियों में नमी बहुत ज्यादा होती है यही वजह है कि उनको प्यास नहीं लगती बल्कि पानी नहीं पीने की वजह से कोआला को ‘नो ड्रिंक एनिमल’ के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही इनकी पहचान धानीप्राणी (Marsupial) स्तनधारी के रूप में भी है।

नहीं होते हैं कोआला के दुश्मन!
कोआला एक ऐसा प्राणी है जिनका शिकार भी नहीं होता अगर ये किसी प्राकृति आपदा की चपेट में ना आएँ या फिर अपनी मौत ना मरे तो ये लंबे समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि कोआला बहुत कम अन्य जीव का शिकार होते हैं। हालांकि कई बार इनके छोटे बच्चों को बड़े पक्षी या सांप अपना शिकार बना लेते हैं।
आप कह सकते हैं कोआला के दुश्मन नहीं होते।या वह किसी का शिकार नहीं होते। कोआला को असमाजिक प्राणी भी का जाता है क्योंकि ज्यादातर वह भावनात्मक सम्बंध खुद की माताओं के साथ या फिर संततियों (Offspring) के बीच ही रखते हैं।
साल 2019-2020 (2019–20 Australian Bushfire Season) में जब ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के जंगलों में भयानक आग लगी तो इस आग में जान माल का भारी नुकसान हुआ और तो और इस आग में लगभग 60 हजार से भी कहीं ज्यादा कोआला जंगल की आग में प्रभावित हुए। जिन जंगलों और पेड़ों पर वह रहते थे वह जलकर राख हो गए।
इतना ही नहीं बताया जाता है कि जंगल की इस भयावह आग में 8 हजार से ज्यादा कोआला की मौत हो गई. जबकि 48 करोड़ से ज्यादा जीव, जंतु, पशु पक्षी और रेंगने वाले जीव इस प्राकृतिक आपदा में मारे गए।
जबकि पिछले 20 सालों में ऑस्ट्रेलिया में कोआला की संख्या में लगभग 33 से 61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. कोआला की घटती संख्या की वजह से ही 10 फरवरी 2022 को ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कोआला को आधिकारिक रूप से लुप्तप्राय प्राणी घोषित कर दिया।
2012 में कोआला को ‘सुभेद्य’ (VULNERABLE) के रूप में घोषित किया गया था। मतलब ऐसा दुर्बल और नाजुक प्राणी जिसे आसानी से शारीरिक या मानसिक आघात पहुँचाया जा सके। साथ ही जलवायु परिवर्तन, आवास विनाश समेत गंभीर मौसम का भी ये सामना नहीं कर सकते।
कोआला में एक और बड़े खतरे का डर होता है ‘क्लैमिडिया’ (Chlamydia) का प्रसार जिसकी वजह से उनमें प्रजनन और अंधापन का खतरा बना रहता है।
कोआला के बच्चों कहा जाता है जॉय !
कोआला जानवर (Koala Animal) के बच्चों को जॉय (JOEY) कहा जाता है। और जन्म के समय कोआला के बच्चे बहरे और अंधे होते हैं। हालांकि इस दौरान जॉय (JOEY) के सूंघने और स्पर्श करने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है। कोआला के शरीर में कंगारूओं की तरह एक थैली होती है और इसी थैली में कोआला अपने बच्चों को पालते हैं।
कोआला के बच्चे जॉय (JOEY) जन्म के समय केवल दो सेंटीमीटर के करीब ही होता है और वजन भी बेहद कम होता है। अपने माँ की थैलियों में कोआला के बच्चे करीब 6 महीने तक रहते हैं और इस थैली में ही कोआला माँ अपने बच्चों को पोषण देती है और इन 6 महीनों के बाद मादा कोआला अपने बच्चों को पीठ पर रखकर पालती है।
क्यों कहा जाता है निशाचर जानवर
कोआला को निशाचर (Nocturnal Animals Koala) जानवर कहते हैं जो ज्यादातर रात में अपने भोजन की तलाश करता है। ज्यादातर समय सोते रहने वाला कोआला 24 घंटों में केवल 10 से 15 मिनट ही अन्य या सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहता है। बताया जाता है कि कोआला फास्कोलार्क्टिडे (Phascolarctidae) परिवार का मौजूदा एकमात्र जीवित प्रतिनिधी है।
साल 2050 तक लुप्त हो जाएंगे कोआला?
आपको एक और अहम जानकारी दे दें। ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाले कोआला को वहाँ पालतू जानवर के रूप में पाला नहीं जा सकता। ऐसा करना यहाँ कानून गलत है।
बताया जाता है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाए जाने वाले कोआला की संख्या तेजी से कम होती जा रही है और ऐसा ही चलता रहेगा तो साल 2050 तक इनके लुप्त होने की आशंका है।

