Penguin: पानी में तैरती है पर मछली नहीं!
Penguin पक्षियों की एक प्रजाति है लेकिन ये पक्षियों की तरह आसमान की ऊंचाई में उड़ नहीं सकती. पेंगुइन पानी के भीतर अपने पंख पसारकर उड़ती है. आप पानी में उड़ने को सही नहीं ठहराएंगे और इसे तैरना ही कहेंगे. लेकिन पेंगुइन चूंकि चिड़ियों की प्रजाति है इसलिए उड़ना कहना ही ज्यादा सही होगा. वहीं दूसरी ओर ये पानी में मछलियों की तरह तैरती तो है लेकिन मछलियों की प्रजाति से इनका कोई संबंध नहीं है. पेंगुइन की ऊंचाई 15 इंच से साढ़े तीन फीट के बीच होती है. ये समुद्र और उनके तटों पर या ग्लेशियरों में रहती हैं और इनका वजन 2 से 80 पाउंड होता है.
वैज्ञानिक नाम- Spheniscidae
काली पीठ और सफेद पेट के लोग कायल
छोटी टांगों और आलसी होने के नाते दुनिया भर में लोग पेंगुइन को खूब पसंद करते हैं. पेंगुइन के पीठ का हिस्से का रंग काला और पेट की तरफ का रंग सफेद होता है. पानी में तैरने के बजाय जमीन पर चलते समय पेंगुइन ज्यादा मनोरंजक लगते हैं क्योंकि वे हिलते हुए चलते हैं. पेंगुइन (Penguin) मुख्य तौर पर दक्षिणी गोलार्ध में ही पाये जाते हैं. पेंगुइन अपनी जिंदगी का आधा समय धरती पर और आधा समय समुद्र में बिताती हैं. बता दें कि खाने की खोज में निकली पेंगुइन समुद्र में एक घंटे में 15 मील की दूरी तय कर सकती है.

इंसानों से नहीं डरती पेंगुइन
पेंगुइन इंसानों से नहीं डरती, और वे बेहिचक उनके पास आते हैं। अंटार्कटिक में पर्यटकों को भी पेंगुइन से दूर रहने की नसीहत दी जाती है. पेंगुइन (Penguin) को समुद्र में लेपर्ड सील जैसे शिकारियों से खतरा है। पेंगुइन में तापरोधी पंखों की मोटी परत होती है जो उन्हें पानी में भी गरम रखती है. एम्परर पेंगुइन, पेंगुइन की सबसे विशाल प्रकार है. पेंगुइन या तो अपने पैरों के सहारे चलते हैं या बर्फ पर अपने पेट से फिसलते हैं.

जलवायु परिवर्तन से खतरे में पेंगुइन
अंटार्कटिक में रहने वाली पेंगुइन के लिए जलवायु परिवर्तन खतरा बना हुआ है. धरती का तापमान बढ़ने के चलते और ग्लेशियर पिघलने की वजह से हजारों पेंगुइन की मौत हो रही है. अंटार्कटिक की एक मशहूर प्रजाति एम्परर पेंगुइन अब उस पर विलुप्त होने का ख़तरा मंडरा रहा है.एक अध्ययन में आशंका जताई गई है कि अंटार्कटिक में एम्परर पेंगुइन की 90 फीसदी आबादी ख़त्म हो सकती है.

