PANGOLIN: पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है जो खतरे का अंदेशा होने पर खुद को इस कदर मोड़ लेता है कि गेंद बन जाता है। सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन सिरे से पूंछ तक पपड़ीदार पैंगोलिन खतरे के दौरान गेंद की तरह लुढकर अपनी सुरक्षा करता है। पैंगोलिन का नाम पेंगुलिंग से आया है जो एक मलय शब्द है और इसका अर्थ है रोल यानि मुड़ सकता है। ज्यादातर जंगली और घास वाले क्षेत्रों में ये पाए जाते हैं और इसकी दूसरी सबसे बड़ी खासियत कि ये दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी होने वाला जानवर है। ये मुख्य रूप से एशिया में भारत और अफ्रीका में पाए जाते हैं।

रात्रिचर स्तनधारी है पैंगोलिन
पैंगोलिन एक रात्रिचर स्तनधारी है जो पारिस्थितिक तंत्र प्रबंधन में अपनी भूमिका मिट्टी को वातकित करने और नमी जोड़ने में निभाते है। पैंगोलिन की 8 प्रजातियां हैं जिनकी चार प्रजातियां अफ्रीका और चार प्रजातियां एशिया में पाई जाती हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature- IUCN) में भारतीय पैंगोलिन को लुप्तप्राय (Endangered -EN) यानि रेड लिस्ट में सूचीबद्ध किया गया है। ये स्तनधारी जीव पिछले करीब 80 मिलियन वर्षों से हमारी धरती पर अस्तित्व में हैं। इन्हें मैमल्स (Mammal) की श्रेणी में रखा गया है।

करीब 40 सेंटीमीटर लंबी होती है PANGOLIN की जीभ
पैंगोलिन आसानी से अपना शिकार कर लेते हैं और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी बेहद लंबी जीभ है। पैंगोलीन की जीभ करीब 40 सेंटीमीटर लंबी होती है इसलिए वो दूर से ही छोटे कीड़े-मकोड़े, चींटियों और दीमक को खाना पसंद करते हैं। माना जाता है कि पैंगोलिन हर साल तकरीबन 70 मिलियन कीड़े-मकौड़ों को खा जाते हैं।
दुनियाभर में पैंगोलिन की होती है सबसे ज्यादा तस्करी
आपके मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस जानवर की सबसे ज्यादा तस्करी क्यों होती है। तो इसका जवाब ये है कि पैंगोलिन का स्केल्स यानि उसकी त्वचा की पूरी दुनिया में बेहद ज्यादा मांग है, क्योंकि पैंगोलिन की स्केल्स से कीमती दवाएं, कॉस्मेटिक्स और चमड़े के उत्पाद तैयार होते हैं। एनवायरमेंट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (EIA) की एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया था कि दुनियाभर की 200 कंपनियों ने पैंगोलिन के स्केल्स से उत्पाद बनाने का लाइसेंस ले रखा है।

पेंगुइन नहीं, ये पैंगोलिन है
बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पहले इस जानवर का नाम ही नहीं सुना है कुछ लोग पैंगोलिन को पेंगुइन समझते हैं जबकि मिलते जुलते नाम वाला ये जानवर पक्षी पेंगुइन से बिल्कुल अलग है। चीन और ताइवान समेत दुनिया के कई हिस्सों में पैंगोलिन के मांस को खाने के रूप में काफी पसंद किया जाता है।
भारतीय पैंगोलिन की खाल की कीमत एक लाख प्रति किलो तक है
इस छोटे से जानवर की खासियत का अंदाजा इस बात से भी लगा लीजिए कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके खाल की कीमत एक लाख रुपये प्रति किलो तक है। ज्यादातर इनकी तस्करी एशिया और अफ्रीका में होती है, पैंगोलिन की खाल के साथ-साथ इसके मांस की पूरी दुनिया में बेहद ज्यादा मांग हैं।

PANGOLIN को भारत में सल्लू सांप (Sallu Snake) भी कहते हैं
दुनियाभर में लोग इसे पैंगोलिन के नाम से जानते हैं लेकिन भारत के गांवों में इन्हें सल्लू सांप (Sallu Snake) भी कहते हैं। जिनकी खाल केरोटिन की बनी होती है ये खाल उन्हें दूसरे जानवरों से खुद को सुरक्षित करती है। सल्लू सांप ऐसे शल्को वाला दुनिया का अकेला ज्ञात स्तनधारी है।
शर्मिला और बेहद शांत जानवर है PANGOLIN
पैंगोलिन एक बेहद शर्मीला जानवर है, वो बिल्कुल नहीं चाहता कि इंसानों से कभी भी उसका सामना हो, इसलिए इंसानों की आहट भर से ही वो अपनी जगह बदल देता है। ज्यादातर इनका आशियाना जमीन के अंदर होता बनी बिल में या फिर किसी खोखले या सूखे पड़े में होता है, लेकिन पैसों की लालच में तस्कर इनकों कहीं से भी ढूंढ निकालते हैं।

डोडो पक्षी की तरह गायब हो जाएंगे PANGOLIN
अगर इसी तरह पैंगोलिन की तस्करी जारी रही तो वो दिन दूर नहीं जब धरती से इनका अस्तित्व मिट जाएगा और ये भी डोडो पक्षी की तरह धरती से गायब हो जाएंगे।
क्या पैंगोलिन से आया था कोरोना वायरस
जिस कोरोना वायरस से पूरी दुनिया तबाह थी तब इस बात की चर्चा जोरो पर थी कि कोविड-19 यानि कोरोना वायरस के लिए पैंगोलिन जिम्मेदार है। हालांकि इस बात का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया और इसकी पुष्टि भी नहीं की जा सकी हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इस पर अध्ययन कर रहे हैं।

