Saturday, April 4, 2026
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Mujra: मुगलों की महफिलों, आजादी की लड़ाई, सिनेमा और अब मोदीजी के भाषण तक!

– अभिजीत पाठक

मुजरा अचानक क्यों आया चर्चा में

2024 के आम चुनाव में पीएम मोदी ने एक भाषण में मुजरा शब्द का इस्तेमाल किया। विपक्ष पर निशाना साधते हुए बोले कि विपक्ष लालटेन लेकर मुजरा कर रहा है। जिसपर विपक्ष उन्हें पीएम पद की गरिमा बचाने की हिदायत देती दिखी।

मुजरे का रिवाज कैसे शुरू हुआ

गुजरे जमाने में महफिलों और कोठों पर मुजरे की शाम सजती थीं। मुगल शासन के दौरान- खासकर दिल्ली, लखनऊ, जयपुर में मुजरा करने की परंपरा एक पारिवारिक कला थी और अक्सर मां से बेटी को दी जाती थी। मुजरा भारत में उस दौर में उभरा, जब मुगलों का शासन अपने चरम पर था। तवायफें नृत्य के प्रदर्शन में जिस हाव-भाव और इशारों का इस्तेमाल करती, उसको मुजरा कहा जाता था। मुजरा तो समाज में स्वीकार नहीं था, इसे देखने के लिए लोगों को तवायफों के कोठे की तरफ रूख करना पड़ता था। लेकिन समाज में किसी को ताना या छींटाकशी करने के लिए मुजरा करने का लोकौक्तिक तौर पर खूब इस्तेमाल होता रहा है। मुजरा करने के ताने तब मारे जाते, जब कोई आदमी या औरत किसी की दासता या चापलूसी में अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाता।

MUJRA DURING MUGHALS
MUJRA DURING MUGHALS

कोठे से जनता के बीच कब पहुंचा मुजरा

पहली बार आम जनता ने मुजरा तब देखा, जब जहांगीर के बेटे परवेज के स्वागत में 1606 में अकबरी सराय में मुजरे का भव्य आयोजन हुआ। 16वीं सदी में शहंशाह अकबर ने फारुखी बादशाह बहादुरशाह को हराकर ताप्ती नदी के किनारे बसे शहर बुरहानपुर को अपने कब्जे में लिया और सत्ता संभालने के लिए अकबर ने अपने बेटे मुरादशाह को भेजा था। अकबर के बेटे मुरादशाह अपने मनोरंजन के लिए खास तौर पर सरायें बनवाया था। मुजरा में बहुत लंबे अरसे तक कथक से मिलती गीत विधा ठुमरी को गजलों के साथ पेश किया गया। शुरू में मुजरा गीत की एक विधा ही थी, जिसमें ठुमरी और गजल का मिलावट होता। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुजरा करने वाली महिलाओं को बुलाया जाता था। लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के दौर में कुछ तवायफ वेश्या बन गईं। और फिर धीरे-धीरे मुजरा वेश्यावृत्ति से जुड़ गया।

Kanpur AjijanBai PIC
Kanpur AjijanBai PIC

मुजरा छोड़ लड़ी आजादी की लड़ाई

कानपुर की अजीजनबाई मूल तौर पर एक मूजरा करने वाली तवायफ ही थीं, जो देशभक्ति की भावना से भरपूर थी। गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए उन्होंने घुंघरू उतार दिए थे। रसिकों की महफिलें सजाने वाली अजीजन क्रांतिकारियों के साथ बैठकर रणनीतियां बनाने लगी थी। कानपुर में नाना साहेब के आह्वान पर अजीजन ने फिरंगियों से टक्कर लेने के लिए स्त्रियों का सशस्त्र दल गठित किया और उसकी कमान संभाली।

hira mandi movie pic
hira mandi movie pic

फिल्मों में मुजरा

लाहौर के हीरा मंडी पर तो हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने शानदार फिल्म बनाई। जिसमें शाही दरबार के मनोरंजन के लिए अफगानिस्तान और उज्बेकिस्तान से महिलाओं को हीरा मंडी लाया जाता था। मुजरा की महफिल में कुलीन वर्ग के शहजादों के खिंचाव का जोरदार तरीके से परदे पर उतारा गया है। मुजरा को बॉलीवुड की फिल्मों जैसे मेहंदी (1958), मुगल-ए-आजम (1960), पाकीजा (1972), उमराव जान (1981), जिंदगी या तूफान (1958) और देवदास (1955) और ना जाने कितनी फिल्मों में दिखाया गया है।

Japan Geisha girl
Japan Geisha girl

जब जापान की गीशा को सेक्सवर्कर समझा गया

जापान की गीशा लड़कियों की तुलना भी हीरा मंडी की तवायफों से हुई लेकिन बाद में जानकारी मिली कि गीशा या गीको पेशेवर मनोरंजनकर्ता हैं। जो पार्टी वगैरह में मेहमानों को जापानी डांस और गाने से उनका मनोरंजन करती थी। गीशा लड़कियां सेक्सवर्कर नहीं थीं। क्योटो में, युवा लड़कियां आमतौर पर 15 साल की उम्र में संचार और आतिथ्य कौशल और विभिन्न पारंपरिक कलाओं को सीखती हैं।

CABARET DANCE INTERNET PICTURE
CABARET DANCE INTERNET PICTURE

क्या इन दिनों मुजरे का चलन बंद हो गया?

मुजरे की परम्परा मुंबई के बाचूबाईवाड़ी क्षेत्र में आज भी जीवित है। बीच शहर में होने के बावजूद वाड़ी क्षेत्र के लोग अनजान रहते हैं। मुजरे का समय रात्रि 9 बजे से 12-30 बजे तक होता है। दिल्ली के कोठों पर 80 के दशक तक मुजरे हुए। लेकिन धीरे-धीरे मुजरे का स्थान डिस्को क्लबों में होने वाले कैबरे डांस ने ले लिया। जब इस कैबरे डांस की आड़ में लोग जिस्मफरोशी करने लगे, तो पुलिस ने 20वीं सदी के अंत में कैबरे डांस पर रोक लगा दी। इसी बीच दिल्ली में मनोरंजन का पूर्व प्रचलित मुजरा नये रंग ढंग में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। इस आधुनिक मुजरे का आनन्द लेने के लिए लोग शाम ढ़लने का इंतजार करते हैं। जब दिल्ली सो जाती है तब यहां नाच-गाने के शौकीनों की महफिल पब और क्लब के तौर पर गुलजार होने लगती है। इसे आज का मुजरा कहना गलत नहीं होगा।

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