TIGER:दुनिया में सबसे ज्यादा बाघ भारत में पाया जाता है।और ये हमारे देश का राष्ट्रीय पशु भी है. कभी हमारे देश में बाघों की संख्या लगातार घट रही थी। जो ना सिर्फ इस प्रजाति के लिए चिंता का विषय था बल्कि हमारी सरकार और पूरे देश के लिए, लेकिन साल 2018 और 2022 के बीच चमात्कारिक रूप से बाघों की आबादी में करीब 23.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।
TIGER: 4 सालों में भारत में तेजी से बढ़ी बाघों की संख्या
30 जुलाई तक की आंकड़ों की माने तो अब इन बड़ी बिल्लियों की प्रजाति की संख्या 3,682 हो गई है। अप्रैल 2022 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3167 आधिकारिक तौर पर बाघों का अंतरिम अनुमान का आंकड़ा जा किया था। जबकि अगर साल 2006 के आंकड़ों की माने तो भारत में बाघों की संख्या 1,411 थी, और करीब चार साल बाद 2018 में बाघों की संख्या बढ़कर 2197 हो गई।

भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा है बाघों की संख्या?
साल 2022 में भारत सरकार द्वारा बाघों की संख्या को लेकर जो आंकड़े जारी किए गए। उसमें मध्य प्रदेश में इनकी संख्या सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 785 बताई गई। तो कर्नाटक में 563, उत्तराखंड में 560 और महाराष्ट्र में 444 थी। करीब बाघों की लगभग एक चौथाई संख्या बाघ संरक्षित क्षेत्रों से बाहर थे। गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और शिवालिक पहाड़ियों में बाघों की आबादी में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। खासतौर पर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इनकी संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। जबकि पश्चिमी इलाकों के कुछ क्षेत्रों में स्थानीयकृत गिरवाट भी देखने को मिली है। अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, नागालैंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बाघों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

TIGER: भारत में सफेद बाघ और ‘अंतर्राष्ट्रीय डाइगर डे’
दुनियाभर में हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय टाइगर डे मनाया जाता है, और मजेदार बात ये है कि दुनिया के 70 प्रतिशत से ज्यादा बाघ भारत में ही पाए जाते हैं। जबकि मध्य प्रदेश के रीवा में देश का सबसे पहला सफेद बाघ पाया गया था। 27 मई 1951 सफेद बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए पहली बार 1955 में सामान्य बाघिन के साथ एक सफेद शेर जिसका नाम मोहन था उसकी ब्रीडिंग कराई गई लेकिन सफलता नहीं मिली और एक भी सफेद शावक पैदा नहीं हुए।

TIGER: शावक बाघों की मौत का सबसे बड़ा कारण
भारत में बाघ शावकों की बड़े पैमान पर मौत हो रही है. जिसको लेकर सरकार भी चिंतित है। शावकों की मौत की सबसे बड़ी वजह बाघों की आनुवंशिक समस्याएं हैं। देश में जंगलों की कटाई बहुत तेजी से हुई है जिसकी वजह से देश में जंगलों का दाया काफी सिमट गया है। यही वजह है कि बाघों की संख्या भी सिमट रही है।

TIGER: आइये जानते हैं साइबेरिया बाघों क बारे में भी
साइबेरिया बाघ (उपप्रजाति पैंथेरा टाइग्रिस अल्टाइका ) सुदूर पूर्वी रूस के खाबरोवस्क और उत्तरी-पूर्वी चीन के ठंडे जलवायु के जंगलों में पाए जाते हैं। दिखने में तो साइबेरियन बाघ अन्य बाघों की उप प्रजातियों से थोड़ा अलग होते हैं। ज्यादातर इनका रंग और आकार से अलग होता है। बताया जाता है कि साइबेरियन बाघ दुनिया के सबसे बड़े बाघ होते हैं। नर साइबेरियन लंबाई करीब 12 फीट तक हो सकती है। और वजन 420 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।
बाघ के बारे में रोचक जानकारियां
1- जैसे हर मनुष्य का फिंगरप्रिंट अलग होता है, वैसे हर एक बाघ की धारी का पैटर्न भी अलग होता है।
2- बाघ संवाद करने के लिए अपने कानों का उपयोग कर सकते हैं।
3- भारत में दुनिया की आधी से अधिक बाघों की आबादी है।
4- बाघों के लिए दस में से केवल एक शिकार ही सफल होता है, एक बड़ा हिरण एक बाघ को एक सप्ताह का भोजन उपलब्ध करा सकता है।
5- बाघ लगभग 20 लाख वर्षों से अधिक समय से अस्तित्व में हैं।
6- बाघ खतरे में हैं और बाघों की आबादी में काफी गिरावट आई है, इसलिए उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ द्वारा ‘लुप्तप्राय’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
7- जंगलों से ज्यादा बाघ पिजड़ों में कैद हैं।

