Honey Badger : दुनिया से धीरे धीरे समाप्त हो रही जानवरों की प्रजाति में एक नाम हनी बेजर का भी है। जिसे भारत में बिज्जू के नाम से जाना जाता है। हनी बेजर का सामना शेर जैसा खूंखार जानवर भी नहीं कर पाते है। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इसे दुनिया का सबसे निडर जानवर होने का दर्जा दिया है। ये मूल रूप से अफ्रीका में पाया जाता है। लेकिन साथ ही दक्षिण पश्चिम एशिया (southwest Asia) और भारतीय महाद्वीप (Indian continent) के कई इलाकों में अभयारण्यों (sanctuaries) में इन्हें संरक्षित करके रखा और इसे धरती से विलुप्त होने का प्रयास किया जाता है।
वैज्ञानिक नाम: मेलिवोरा कैपेंसिस (Mellivora Capensis)
लेकिन कई बीमारियों में हनी बेजर के खाल का इस्तेमाल दवाओं को बनाने में किया जाता है इसलिए इंसानों को बचाने के लिए ये दुर्लभ प्रजाति का जानवर शिकारियों से नहीं बच पाते। हनी बेजर मेलिवोरा प्रजाति (Melivora species) का है, लेकिन प्राणि शास्त्र में इसे मस्टेलिडाए (Mustelidae) कुल में रखा जाता है।
नेवले की तरह शातिर और भालू की तरह बेहद आलसी है ये – Honey Badger
हनी बेजर जानवरों को मारकर उनका मांस तो खाता ही है, साथ ही अपने खूंखार नाखूनों और दांतों की मदद से गहरे दबे इंसानों की लाशों को भी कब्र से निकालकर खा जाता है। हनी बेजर नेवले की तरह शातिर होता है और भालू की तरह बेहद आलसी। इसके शरीर में इतनी फूर्ती होती है की एक साथ बाघों और शेरों के झुंड को भी हरा सकता है। लेकिन इसके कद काठी और चाल से इसका अंदाजा लगाना कठिन होता है।
हनी बेजर शहद के साथ ही उसका लार्वा भी बड़े चाव से चट कर जाता है। इसलिए इसका नाम हनी बेजर रखा गया है। भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में हनी बेजर की मौजूदगी मानी जाती है।
जैसाकि हमने बताया इसके दांत और नाखून काफी तीखे और पैने होते हैं, इसलिए कोई भी जानवर हनी बेजर से दुश्मनी मोल नहीं लेता और ये ढिठाई से सियार और लोमड़ी के घरों पर अफना कब्जा जमा लेता है। और उसी में अपना आशियाना बना लेता है। अपना माद या घर बनाने के लिए हनी बेजर को कम समय लगता है। कहा जाता है कि ये नये स्थान पर 20 से 30 फीट गहरा मांद बनाकर रोजाना रह सकता है।
कई जानवरों की खूबी एक में – Honey Badger
हनी बेजर कभी भी दिन में शिकार नहीं करता बल्कि लकडबग्घे की तरह ही ये भी शिकार के लिए आधी रात में निकलता है। और दिन में अपने मांद (den) में पड़ा रहता है। स्वभाव से बेहद आलसी होने के बावजूद ये लड़ने में फुर्तीला (active ) होता है। हनी बैजर का जीवनकाल करीब 15 से 20 साल होता है।
हनी बेजर के शरीर का रंग औसतन भूरा, पेट काला, माथा उजला होने के साथ ऊंचाई 3 फीट तक होती है। बिज्जू का वजन करीब 9-11 किग्रा होती है।
दवाओं के लिए इसका जमकर हो रहा शिकार
हनी बैजर को वन्य जीव संरक्षण (wildlife Reserve) के अंतरराष्ट्रीय संस्थानों (international institutions) ने भले ही एक दुर्लभ जानवर घोषित किया है लेकिन असाध्य दवाओं के लिए इसका जमकर शिकार किया जाता है। हनी बैजर के वंश की कई प्रजातियां धरती पर पहले से विलुप्त हो चुकी हैं। इसलिए हनी बेजर को बचाने के प्रयासों को बढ़ाने की जरूरत है।

