
5वीं बार रूस के राष्ट्रपति बने व्लादिमीर पुतिन
सोने की तरह चमचमाता विशाल दरवाजा खुलता है. और रूस के मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन राजधानी मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में पहुंचते हैं ताकि अगले 6 और साल के लिए वो देश की कमान यानि रूस के 5वें राष्ट्रपति पद की शपथ ले सकें.71 साल के व्लादिमीर पुतिन ने आम चुनाव में करीब 87 प्रतिशत वोट पा कर इस चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की थी. हालांकि उनकी इस जीत पर रूस और दुनियाभर में सवाल उठा था। लेकिन पुतिन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।
पुतिन 2030 तक रूस के राष्ट्रपति के पद पर बने रहेंगे
5वीं बार राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन, जोसेप विसारिओनोविच स्टालिन के बाद राष्ट्रपति के पद के पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले रूस के पहले नेता बन गए हैं। जोज़ेफ स्टालिन एक रूसी क्रांतिकारी और राजनेता थे जो अपने मृत्यु 1924 से 1953 तक सोवियत संघ के नेता थे। अब व्लादिमीर पुतिन 2030 तक रूस के राष्ट्रपति के पद पर बने रहेंगे, इतना ही नहीं इसके बाद भी पुतिन अगले कार्यकाल के लिए एक बार फिर से दावेदार होंगे।

शपथ के बाद पुतिन ने कहा रूस होगा और मजबूत
पद और गोपनियता की शपथ लेने के बाद पुतिन ने देशवासियों का आभार जताया और रूसी लोगों से वादा किया कि अपनी शक्ति के भीतर वो सबकुछ करेंगे जो देश की भलाई के लिए होगा। उन्होंने जनता से अपील की और कहा कि यह एकजुटता का समय है और हम सब को मिलकर उन सभी बाधाओं को दूर करना हो जो देश की प्रगति में बाधा पैदा करती हैं। पुतिन ने अपने शपथ के बाद ये भी कहा कि रूस अब और मजबूत होगा, और हम उन देशों के साथ भी रूस अपने रिश्ते मजबूत करेगा, जो हमें दुश्मन समझते हैं।

खुफिया अधिकारी से राष्ट्रपति बनने तक का पुतिन का सफर
व्लादिमीर पुतिन राजनीति में कदम रखने से पहले खुफिया अधिकारी थे। साल 1991 में पुतिन ने राजनीति में कदम रखी और वो सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर बनें, फिर पुतिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1998 में तत्कालिन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने पुतिन को FSB सुरक्षा सेवा का प्रमुख बनाया और फिर अगले साल ही वो देश के प्रधानमंत्री बन गए। फिर जब येल्तसिन ने इस्तीफा दिया तो पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बन गए। और फिर कुछ दिन बाद ही पुतिन ने रूस की सत्ता अपने हाथ में ले लिया।

साल 2000 में पहली बार बने थे राष्ट्रपति
अगस्त 1999 में पुतिन पहली बार प्रधानमंत्री बने थे और कुछ ही महीने बाद दिसंबर में वो कार्यवाहक राष्ट्रपति बने फिर अगले साल यानि 2000 में पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली। इसके बाद 2004, 2012 और 2018 में भी राष्ट्रपति चुने गए थे। अब साल 2024 के चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज करने के बाद वो फिर से यानि 5वीं बार राष्ट्रपति चुने गए हैं।

राष्ट्रपति पुतिन के सामने चुनौतियां
पिछले करीब 3 साल से युद्ध संकट का सामना कर रहे रूस के सामने कई चुनौतियां हैं। युद्ध की वजह से पश्चिमी प्रतिबंधों का भी रूस सामना रहा है जिसकी वजह से रूसी अर्थव्यवस्था को काफी झटका लगा है पुतिन के सामने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। इतना ही नहीं रूस के मुख्य विपक्षी नेता एलेक्सी नावेलनी की जेल में रहस्यमय हालात में मौत होने की वजह से पुतिन को देश और विदेश में भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। पुतिन के ज्यादातर विरोधी या देश छोड़ चुके हैं या फिर वो जेल में हैं और इस वजह से पुतिन की साख को काफी झटका लगा है।


