कोलंबो: श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में रविवार, 9 अगस्त को आसमान का नजारा कुछ ऐसा था, जिसे देखकर हर किसी की नजरें ऊपर ठहर गईं। समुद्र किनारे सैकड़ों रंग-बिरंगी पतंगों ने पूरे आसमान को अपने रंगों से भर दिया। मौका था श्रीलंका के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का।
कोलंबो के गॉल फेस ग्रीन में आयोजित इस महोत्सव में दुनिया के कई देशों से आए पतंग उड़ाने वाले कलाकारों ने हिस्सा लिया। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन का मकसद केवल पतंगबाजी को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि दुनिया के सामने श्रीलंका को एक पर्यटन स्थल के रूप में पेश करना भी है।
समुद्र किनारे आसमान में दिखी रंगों की दुनिया
रविवार को गॉल फेस ग्रीन में परिवारों, पर्यटकों और पतंगों के शौकीनों की बड़ी भीड़ जुटी। समुद्र के किनारे बने इस खुले मैदान से अलग-अलग आकार और रंगों की पतंगें आसमान में उड़ती नजर आईं।
किसी पतंग का आकार बड़ा था तो कोई अपने अनोखे डिजाइन के कारण लोगों का ध्यान खींच रही थी। समुद्र, खुला आसमान और सैकड़ों रंगीन पतंगों ने पूरे इलाके को एक उत्सव में बदल दिया।

पहली बार रात में भी उड़ीं रोशन पतंगें
इस महोत्सव की सबसे खास बात श्रीलंका का पहला रात्रि पतंग महोत्सव रहा। रात के समय रोशनी से सजी पतंगों को आसमान में उड़ाया गया।
अंधेरे आसमान के बीच चमकती पतंगों ने कोलंबो के आसमान को एक अलग ही रूप दे दिया। इस दौरान लोग समुद्र किनारे खड़े होकर रोशन पतंगों का नजारा देखते रहे।
30 देशों से पहुंचे करीब 80 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी
आयोजकों के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में 30 देशों से करीब 80 अंतरराष्ट्रीय पतंग उड़ाने वाले पहुंचे। इनके अलावा 1,500 से ज्यादा स्थानीय प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इससे यह आयोजन केवल स्थानीय उत्सव न रहकर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम बन गया, जिसमें अलग-अलग देशों के लोगों ने अपनी पतंग उड़ाने की कला और संस्कृति को साझा किया।
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एक दिन का नहीं, पूरे हफ्ते चलेगा महोत्सव
पतंग महोत्सव को अब एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रम में बदल दिया गया है। इसमें पतंग उड़ाने के अलावा कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई अन्य गतिविधियां भी शामिल हैं।
आयोजकों को उम्मीद है कि इस तरह के आयोजन श्रीलंका की संस्कृति और पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने में मदद करेंगे।
रंग-बिरंगी पतंगों से सजा कोलंबो का आसमान इस महोत्सव के दौरान सिर्फ मनोरंजन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि श्रीलंका की संस्कृति, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय मेलजोल की एक खूबसूरत तस्वीर भी पेश करता नजर आया।

