क्या आप भारत की नई संसद के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं तो उसके लिए आपको कम से कम 5 मिनट का वक्त निकालना होगा. और इसी पूरी जानकारी को तसल्ली से पढ़ना होगा.
भारत की नई संसद का उद्घाटन 28 मई दिन रविवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. जो पुनर्निर्मित सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है.
और इस विशालकाय भव्य इमारत को मशहूर आर्किटेक्ट बिमल पटेल ने डिजाइन किया है. जिसका निर्माण कार्य 2019 में ही शुरू हो गया था.
नया संसद बनाने की क्यों पड़ी जरूरत?
साल 2026 के बाद सीटों की कुल संख्या से रोक हट जाएगा. जिसके बाद लोकसभा सीटों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ने की संभावना है, ऐसे में नए सांसदों के लिए सीटों की जरूरत होगी. मौजूदा समय में 545 सीटें लोकसभा में मौजूद है.
पुरानी संसद में कई तरह की समस्याएं थी साथ ही आधुनिक तकनीक से जोड़ने में भी संसद को दिक्कत पेश आ रही थी. जल आपूर्ति से लेकर सीवर लाइन, फायर ब्रिगेड उपकरण, एसी, CCTV कैमरे जैसी कई मूलभूत सेवाओं की समस्याएं थी. इसके अलावा कई जगहों पर जल रिसाव संबंधित भी दिक्कतें पेश आ रही थी. जिसकी वजह से संसद भवन की सुंदरता भी खराब हुई थी.
संसद भवन में अग्नि सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा है.
साथ ही देश का पुराने संसद का निर्माण तब हुआ था जब दिल्ली भूकंपीय जोन-सकेंड में था. लेकिन अब दिल्ली भूकंपीय जोन-फाइव में आता है. जो संसद की सुरक्षा चिंताओं को बहुत ज्यादा बढाता है.
इसके अलावा पुराने संसद में कर्मचारियों की कार्यस्थल की भी काफी समस्याएं थी. जिसको दूर करने की भी लंबे समय से जरूरत थी.
नए संसद को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है.
नए संसद को पर्यावर के अनुकूल बनाया गया है. नए भवन में विद्युत की खपत में तीस प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद जताई गई है.
साथ ही जल संचयन और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों से नई संसद पूरी तरह लैस है. सबसे अच्छी बात ये है कि अगले 150 सालों तक ये संसद सुचारू रूप से काम करने में सक्षम होगा.
नई संसद का आकार कैसा है?
नया संसद भवन का निर्माण जिस भूमि पर हुआ है उसका आकार त्रिकोणीय है. इसलिए नए संसद भवन का आकार भी त्रिकोणीय है.
साथ ही नई संसद अलग-अलग धर्मों में पाई जाने वाली पवित्र ज्यामिति से भी प्रभावित है. साथ नई और पुरानी दोनों संसद दोनों भवनों का एक ही परिसर है.
लोकसभा की खासियत
नए लोकसभा कक्ष में एक मोर जो कि हमारा राष्ट्रीय पक्षी है उसके पंखों के समान नक्काशीदार डिजाइन तैयार किया गया है. जिसका सुंदरता हर किसी को आकर्षित करती है.
लोकसभा कक्ष में अब 543 सांसदों की बैठने की जगह 888 सीटें मौजूद होंगी, इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर इसकी क्षमता को 1272 सीटों तक बढ़ाया जा सकेगा.
जबकि सेंट्रल हॉल के अभाव में लोकसभा का इस्तेमाल दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों के लिए किया जा सकेगा.
राज्यसभा में क्या होगा खास
राज्यसभा कक्ष में अब 384 सांसदों को समायोजित किया जा सकेगा. पुराने राज्यसभा में केवल 250 संसद सदस्यों के बैठने की क्षमता मौजूद है.
लाल कालीनों के साथ राज्यसभा कक्ष को कमल के थीम के रूप में सजाया गया है. जो इसकी सौन्दर्यता को काफी ज्यादा बढ़ा देता है.
आधुनिक तकनीक से लैस होगी दोनों संसद. जिस जगह दोनों सदनों के सांसद बैठेंगे वहां उनके बेंच के सामने डेस्क पर टच स्क्रीन मौजूद होगी.
नए संसद में एक संविधान सभागार भी बनाया गया है. जहां भारत की लोकतंत्र की यात्रा का पूरा दस्तावेजीकरण किया गया है.
भारत के इस नई संसद को बनाने के लिए पूरे देश के अलग-अलग कोनों से निर्माण सामग्रियां मंगाई गई. जिसमें नागपुर से लकड़ियां, धौलपुर से बलुआ पत्थर, जैसलमेर से ग्रेनाइट और मुंबई के शिल्पकारों और भदोही के बुनकरों का भी योगदान रहा.
1993 में संसद के मुख्य गेट पर लगाई गई राष्ट्रपति महात्मा गांधी की 16 फुट ऊंची कॉस्य की प्रतिमा को अब नए और पुराने भवनों के बीच स्थानांतरित कर दिया गया है.
गांधी जी की इस प्रतिमा का निर्माण मशहूर सम्मानित मूर्तिकार राम वी सुतार ने बनाया था जिन्हें भारत ने पद्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित भी किया था.
गोल्डन राजदंड जिसे सेन्गोल भी कहा जाता है वो लोकसभा कक्ष में स्पीकर के पोडियम के पास में रखा गया है. इस सेन्गोल को अंग्रेजो से सत्ता हस्तांतरण को चिन्हित करने के लिए आजादी की पूर्व संध्या पर मौजूदा प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था. जिसे तमिलनाडु के पुजारियों ने जवाहरलाल नेहरू को दिया था.
सेंट्रल विस्टा में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, दक्षिण और उत्तर ब्लॉक, इडिया गेट और राष्ट्रीय अभिलेखागार शामिल है.
करीब 6.5 मीटर ऊंची 9500 किलोग्राम की अशोक स्तंभ के सिंह को भवन के शीर्ष पर लगाया गया है. जो हमारे देश के राष्ट्रीय प्रतीक की पहचान है.

