भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हीरो हैं स्नेह राणा
SNEH RANA: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ऑल राउंडर हैं. जिनके नाम चेन्नई के एम चिदंबर स्टेडियम में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच को जिताने का सबसे ज्यादा श्रेय जाता है. इस मैच में स्नेह ने 10 विकेट हासिल किए और इंडिया ने ये मुकाबला 10 विकेट से जीत लिया. स्नेह राणा के इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का खिताफ भी मिला.
ये तो रही वो बात जिसकी वजह से स्नेह राणा अब पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी हैं. उनके बारे में खूब चर्चा हो रही है और उनके बारे में लिखा, पढ़ा जा रहा है. आइये अब आपको ये भी बताते हैं कौन हैं स्नेह राणा और क्रिकेट में कैसी हुई उनकी एंट्री.

9 साल से ही क्रिकेट खेलने की शुरूआत की, और फिर कारवां रूका नहीं
स्नेह राणा देहरादून की सिनोला गांव की बेटी हैं. और यहीं से क्रिकेट की दुनिया में उनकी एंट्री हुई जब वो महज 9 साल की थीं. वो सिनोला गांव की गली मोहल्लो में क्रिकेट खेलती थीं. धीरे-धीरे क्रिकेट में उनके खेल की चर्चा होने लगी. कई बार ऐसा भी हुआ जब लड़कों की टीम में वो अकेली लड़की थीं. धीरे-धीरे क्रिकेट में उनकी रूची बढ़ने लगी. फिर स्नेह राणा ने लिटिल मास्टर क्रिकेट एकडमी ज्वाइन किया. हालांकि यहां तक पहुंचने में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा. जिसमें आर्थिक समस्या भी रहीं. हालांकि स्नेह राणा के घर वालों ने उनका पूरा सहयोग किया
स्नेह राणा का जीवन परिचय
स्नेह राणा का जन्म 18 फरवरी 1994 में देहरादून में हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय भगवान सिंह राणा है, जबकि मां का नाम विमला राणा है. स्नेह की लंबाई 5 फिट 8 इंच है. शुरूआती शिक्षा वैली पुब्लिक स्कूल से पूरी करने के बाद स्नेह बीबीके देव कॉलेज फॉर गर्ल्स से आगे की पढ़ाई पूरी की. उनके शुरूआती दिनों के कोच का नाम किरन शाह और नरेंद्र शाह है.

आल राउंडर और स्पिन गेंदबाज के तौर पर खेलती हैं स्नेह राणा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम में स्नेह राणा एक आल राउंडर और स्पिन गेंदबाज के तौर पर खेलती हैं. वो दाये हाथ की बल्लेबाज और दायें हाथ से ऑफ ब्रेक गेंदबाजी करती हैं. 30 साल की ये खिलाड़ी ने महज 16 साल की उम्र में भारतीय टीम में जगह बनाने में कामयाब हो गईं थीं. हालांकि साल 2014 में स्नेह को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय भारतीय महिला क्रिकेट स्क्वैड में शामिल किया गया था. जिन्होंने अपनी जबरदस्त खेल प्रतिभा और काबिलियत से इंटरनेशनल क्रिकेट में पहचान बना चुकी हैं. और भारतीय क्रिकेट टीम में 2 नंबर की जर्सी पहनती हैं.
पढ़ाई और फुटबॉल में भी अव्वल थीं स्नेहा राणा
क्रिकेट के अलावा फुटबॉल में भी बहुत अव्वल थीं. और पढ़ाई में भी वो बेस्ट थीं 10 वीं और 12 वीं में उन्होंने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए थे. उनके कोच बताते हैं कि जब वो ट्रेन में भी सफर करती थीं तो अपने साथ अपनी किताबें जरूर ले जाती थीं और मौका मिलते ही पढ़ाई करती थीं.

स्नेहा की कामयाबी से गदगद हैं उनके कोच
स्नेहा के नरेंद्र शाह उनकी कामयाबी से बेहद खुश हैं. वो बताते हैं कि एक मैच में स्नेहा के 10 विकेट से अनिल कुंबले की याद ताजा हो गई. जब उन्होंने भी चेन्नई में 10 विकेट लिए थे. और चेन्नई में भी ही स्नेहा ने एक मैच में 10 विकेट लेकर इतिहास रच दिया है. वो बताते हैं कि वो मैच देख रहे थे और स्नेहा पहले एक विकेट लेती है, फिर दो विकेट लेती है. और देखते ही देखते ही वो कुल दस विकेट ले लेती है. ये सब देखकर मेरा दिल गदगद हो गया. नरेंद्र शाह बताते हैं कि सालों की मेहनत और एक खूबसूरत सपने के सच होने जैसा था.
स्नेह राणा के कोच ने कैसे और कब उनके टैलेंट को पहचाना
स्नेह के कोच नरेंद्र शाह बताते हैं कि हम लोग बनारस खेलने गए थे. तो उस समय हमने टेनिस बॉल से खेलते हुए स्नेह को पहली बार देखा, उस मैच में स्नेह सीनियर लड़कियों के साथ खेल रही थीं. और स्नेहा तब सिर्फ 12 साल की थी. उस मैच में उन्हें बेस्ट प्लेयर का अवार्ड मिला. उस मैच में स्नेह ने 5 विकेट लिए और 60 रन बनाए. बस उसी मैच को देखकर उनके कोच को लग गया कि स्नेह राणा एक दिन जरूर भारतीय टीम के लिए खेलेंगी.
स्नेह उत्तराखंड से हैं लेकिन पंजाब और हरियाणा से खेला क्रिकेट
स्नेह राणा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से हैं लेकिन पंजाब से खेलने की उनकी मजबूरी ये थी कि तब उत्तराखंड का अपना कोई क्रिकेट एसोसिएशन नहीं था. इसलिए पंजाब और हरियाणा जाकर उन्होंने खेलना शुरू कर दिया. और लंबे समय तक पंजाब में शानदार खेल की वजह से उनका चयन भारतीय क्रिकेट टीम में हुआ.
इंजरी के कराण स्नेह का भारतीय क्रिकेट से रहना पड़ा दूर
स्नेह राणा को इंजरी के कारण 5 सालों तक इंटरनेशनल खेलों से दूर रहना पड़ा. 2014 से 2016 तक टीम इंडिया का हिस्सा थीं. लेकिन फिर चोट लगने की वजह से उन्हें लंबे समय तक अंतर्राष्ट्रीय खेलों से दूर रहना पड़ा. हालांकि जब उन्होंने दोबारा टीम इंडिया में लौटीं तो उन्होंने धमाकेदार प्रदर्शन किया.
भारतीय महिला क्रिकेट में सुधार से बहुत खुश हैं स्नेह राणा
स्नेह राणा इस बात से बेहद खुश हैं कि भारतीय महिला क्रिकेट की सुविधाएं पहले से बहुत ज्यादा बेहतर हुई हैं. वो बताती हैं कि कभी वो ट्रेन से सफर करती थीं. और कई बार टिकट भी कन्फर्म नहीं होती थी. लेकिन आज फ्लाइट में वो भी बिजनेस क्लास में सफर करते हैं. मतलब सुविधाएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं.
अगर क्रिकेटर नहीं होती तो क्या होती स्नेह राणा
स्नेह बताती हैं कि अगर वो क्रिकेट नहीं होती तब भी खेल से ही जुड़ी होती. हालांकि वो बताती हैं कि क्रिकेट के अलावा उन्हें बैडमिंटन काफी पसंद है. और वो कहती हैं अगर क्रिकेटर नहीं होती तो शायद बैडमिंटन खिलाड़ी होती.

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स्नेह राणा को क्या पसंद है
स्नेह को चाय पीना और घर का खाना पसंद है खास तौर पर मां की हाथ का बना खाना वो बहुत मिस करती हैं. जब वो घर से दूर होती हैं. इसके अलावा खाली टाइम में पेंटिंग करना और डांस करना पसंद करती हैं. और जब जब मौका मिलता है वो म्यूजिक सुनना पसंद करती हैं.
स्नेह राणा को प्यार से लोग चारु भी बुलाते हैं
बहुत कम लोग ही जानते हैं कि स्नेह को एक और नाम चारू है. और जो भी उनके इस नाम को जानता है वो उन्हें चारू कहकर ही बुलाता है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम में ज्यादातर खिलाड़ी उन्हें चारू कहकर ही बुलाते हैं. साथी खिलाड़ियों के बीच में स्नेह चारु के नाम से ही पहचानी जाती हैं.

