Thursday, September 3, 2026
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किताबें चुप रहकर भी जिंदगी को बोलना सिखाती हैं: राजेश चन्द्र मिश्र

लखनऊ में ‘आसमान छूने की जिद’ का विमोचन, युवाओं को संघर्ष और निरंतर प्रयास से सफलता हासिल करने का संदेश

लखनऊ। लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश चन्द्र मिश्र की पुस्तक ‘आसमान छूने की जिद’ का शनिवार को गोमतीनगर स्थित यूनिवर्सल बुक सेलर शाखा में विमोचन किया गया। यूनिवर्सल लिटरेरी एजेंसी द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के महानिदेशक जय नारायण सिंह, पूर्व आईएएस अधिकारी एवं उत्तर प्रदेश स्टेट पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल के वाइस चेयरमैन के. रविन्द्र नायक, प्रमुख सचिव श्रम-सेवायोजन एवं प्राविधिक शिक्षा एम.के.एस. शमुगम सुंदरम, यूनिवर्सल बुक सेलर के मालिक चंदर प्रकाश और लेखक राजेश चन्द्र मिश्र ने संयुक्त रूप से किया।

युवाओं को संघर्ष से सफलता तक का संदेश

पुस्तक के विषय पर बात करते हुए राजेश चन्द्र मिश्र ने कहा कि किताबें खुद चुप रहती हैं, लेकिन इंसान को बोलना, सोचना और जिंदगी को समझना सिखाती हैं। उन्होंने कहा कि आज गैजेट्स और सोशल मीडिया के दौर में कंटेंट की भरमार है, लेकिन किताबों की उपयोगिता और उनका महत्व कम नहीं हुआ है।

उन्होंने बताया कि ‘आसमान छूने की जिद’ प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखने और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष करने की प्रेरक कहानी है। पुस्तक का नायक कई मुश्किलों के बावजूद किताबों का साथ नहीं छोड़ता और संघर्ष करते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचता है।

लेखक के मुताबिक, पुस्तक खासतौर पर युवाओं को मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा देती है।

लेखक राजेश चन्द्र मिश्र ‘आसमान छूने की जिद’ पुस्तक के साथ
‘आसमान छूने की जिद’ पुस्तक के साथ लेखक राजेश चन्द्र मिश्र।

किताबों की अहमियत कभी कम नहीं होगी: जय नारायण सिंह

ईओडब्ल्यू के महानिदेशक जय नारायण सिंह ने कहा कि बदलते दौर और आधुनिक तकनीक के बावजूद किताबों की अहमियत कभी कम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है। रचनात्मक और प्रेरणादायक साहित्य को हर दौर में पाठकों का सम्मान और स्नेह मिलता रहा है।

युवाओं को वास्तविक संघर्ष से परिचित कराती हैं किताबें

पूर्व आईएएस अधिकारी के. रविन्द्र नायक ने कहा कि किताबें इतिहास और समाज का दस्तावेज होती हैं। आज के युवाओं को ऐसी पुस्तकों की जरूरत है, जो उन्हें जीवन के वास्तविक संघर्षों से परिचित कराएं और आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।

वहीं, प्रमुख सचिव एम.के.एस. शमुगम सुंदरम ने कहा कि सफलता सिर्फ यूपीएससी या राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। व्यक्ति जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है, वहां मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास के जरिए सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘इंटरव्यू रिडिफाइन’ से जुड़े अनुभव भी साझा किए।

‘आसमान छूने की जिद’ पुस्तक के साथ लेखक राजेश चन्द्र मिश्र और अतिथि
‘आसमान छूने की जिद’ पुस्तक के साथ लेखक राजेश चन्द्र मिश्र और कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।

जल्द ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी पुस्तक

कार्यक्रम की शुरुआत में मानव प्रकाश और गौरव प्रकाश ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। यूनिवर्सल लिटरेरी एजेंसी के पार्टनर मानव प्रकाश और गौरव प्रकाश ने बताया कि ‘आसमान छूने की जिद’ जल्द ही प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।

पत्रकारिता से जुड़ा रहा है लेखक का सफर

मूल रूप से मऊ जनपद के रहने वाले राजेश चन्द्र मिश्र पिछले डेढ़ दशक से आजमगढ़ में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह दैनिक हिंदुस्तान की संपादकीय टीम से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वाराणसी और सोनभद्र समेत कई स्थानों पर पत्रकारिता का अनुभव रखने वाले मिश्र पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र रहे हैं।

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कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी एवं उत्तर प्रदेश सरकार की गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस., आईएएस अधिकारी एवं सचिव लोक निर्माण विभाग दिव्य प्रकाश गिरी, आईआरएस एवं डिप्टी कमिश्नर आयकर अरविंद चौहान, एसीपी लखनऊ पुलिस अभिषेक प्रकाश, डॉ. लुबना कमाल, वैज्ञानिक सुमित कुमार श्रीवास्तव, रंगकर्मी अभिषेक पंडित, राधवेन्द्र मिश्र, अरविंद कुमार पांडे, पत्रकार रविशंकर पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष मऊ मनोज राय, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी एलआईसी रमेश सिंह, श्रीमती संध्या सिंह और अध्यापिका रेनू पांडे समेत कई साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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